Wednesday, November 9, 2011

दुनियादारी नहि बूझि सकल ........

भेंट भेल एक दिन हमरा,
एही लोकक ढ़ेरीक बीच,एकटा प्राणी 

निश्छल,पवित्र छल गाय जेकाँ
कोमल हृदयी छल माय जेकाँ 
ओ निर्मल छल निर्झर जल सन 
व्यक्तित्व समूचा दर्पण सन 

ओ शांत सुदूर देहात जेकाँ 
उपियोगी केरा पात जेकाँ 
ओ पावन चारू धाम जेकाँ 
आ मीठ स्वभावे आम जेकाँ 

नहि ओझरायल जट्टा सन छल 
नहि मधुमाछिक छत्ता सन छल 
नहि धूर्ते छल सियार जेकाँ 
नहि निष्ठुर पूषक जार जेकाँ 

अपना कें सधने, योगी छल 
दुनियाक नजरि में रोगी छल 
सदिखन सबठा सत्कार करय
निस्वार्थ सभक उपकार करय  

बस एक्कहि टा छल एब मुदा,
नहि अर्थ प्रतिष्ठा लूझि सकल 
दुनियादारी नहि बूझि सकल  

Thursday, May 26, 2011

आऊ राष्ट्र निर्माण करी...

अपन  अपन क्षमता के परखी ,
अनकर सब सम्मान करी , आऊ राष्ट्र निर्माण करी....

कहिओ सोचल बालक नरेन्द्र सँ कोना विवेकानंद भेला 
ध्यान देल कहिओ जे गाँधी कोना महात्मा बनि सकला 
कहिओ विचार ई आयल कोना, किछु नाम अमर इतिहास बनल 
कहिओ ई मन में भेल , कोना ध्रुव अपन बात पर अडिग रहल 
अपनों सब ई क' सकैत छी, 
बस शक्तिक अपन आह्वान करी, आऊ राष्ट्र निर्माण करी....

ई देश आई भ्रष्टाचारक अति घृणित रोग सँ ग्रसित भेल 
जकरा लग अछि सामर्थ्य, विभव से अपने ताले नचैत गेल 
जनिका पर छनि नेतृत्व भार से अपने रोटी सेकलनि  अछि 
आ जनिका पर दारोमदार से बैसि तमाशा देखलनि अछि 
की ककरो नहीं एतबा पलखति,
जे देश अपन अछि ध्यान करी, आऊ राष्ट्र निर्माण करी....

एकसर ताकत की क' सकैत अछि, आई हजारे* देखा देलनि
फेर अलख ओ राष्ट्र भावना केर मानस में जगा देलनि 
जागू आबो संकल्प लिय' ओ राष्ट्र धर्म निर्वाह करू 
ई देश अपन अछि डगमगाइत ज', मिली जुली सब क्यौ ठाढ़ करू
मुदा ताहि सब सँ पहिने 
अपना चरित्र निर्माण करी , आऊ राष्ट्र निर्माण करी....
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हजारे- अन्ना हजारे 


Wednesday, May 11, 2011

फगुआ-२

फगुआ में मुंह रंगायल तेहन सब लागि रहल छी 
जे चिन्ह्बा में देखबा सँ' नहि क्यौ आबि रहल छी 
मुदा कहू कहिया मनुक्ख चिन्ह्बा में आयल 
त' रंग अबीरक दोष किय' हम मानि रहल छी 

फगुआक नाम पर संगी सबकें भिजा देलहुं अछि 
कतेक बाल्टी पानि आइ सब हेरा देलहुं अछि 
मुदा कहू की नहि अकारणो नष्ट करै छी 
त' किय' दोष फगुआक माथ पर मढ़ी रहलहुं अछि 

बड़का-बड़का बोतल राखल सबहक दलान पर 
सब खा-पी क' अछि टुन्न भेल फगुआक नाम पर 
मुदा कहू पदवीक नशा की नहि रहैत अछि 
तखन किय' आक्षेप कहू पावनिक शान पर  
अपना प्रवित्ति में नहि सुधार क्यौ आनि रहल छी 
रंग अबीरक.................

फगुआ-१


कत्त' जा रहलहुं अछि बौआ 
हुडदंग हेतई बाहर में, पुछि देल्थिन माय ओकर 
जखन-२ निकली हम टोकब जरुरी छौ,
होली छै,
संगी सब संगे हम रंग खेला फेरो त' 
घूमि-घामि एही ठाम आयब ने 
खिसिया क' बाजल ओ 

बेसी नहीं दूर जायब,
छौंड़ा सब पी-पा क' घुमैत रहैत छैक 
सड़कहिं पर मारि-पीट करैत रहैत छैक 

बड़बड़ाइत  मनहि मन, ठीक छै, ततबा कहि
झट मोटरसाईकिल उठा , विदा भेल जल्दी सँ
गाड़ी सँ' नहि जाऊ, माय फेर टोकि देल्थिन 
मुदा एतेक सुनबा केर फुर्सति कहाँ ओकरा,
अपनहि टा सुनलनि ओ 

ईम्हर बाबू साहेब, अयला संगी सब लग   
ओहि दिन के छोडितनि?
रंग आ अबीर सँ' शरीर हिनक रंगा गेल 
जाबत धरि बुझबा में अबितनि  किछु 
ताबत धरि हरियर आ पीयर सँ देह-हाथ सना गेल 

होली है, होली है, सस्वर चीत्कार भेल 
तकर बाद किछु बोतल मुंह में ढरा गेल 
नाच गान सेहो जरूरी एहि अबसर पर 
अनका हो दिक्कत त' हिनका की ताहि सँ' 

एखन नब शोणित अछि 
खयता नहि, पीता नहि, नचता नहि एखने 
त' ई सब की होइत छै बुढ़ारी में ककरो सँ' 

नचबा केर बाद छलैक, प्लान कतहु घुमबा केर 
एक्कहि टा गाड़ी छल सेहो दुपहिए टा 
ताही पर चारि गोटे, ककरा परवाहि मुदा ,
ततबे नहि बैसल सब ओही पर जुआने जखन हो 
आ स्पीड गाड़ी के सय सँ' ज' कम हो 
त' सम्मानक क्षति नहि ई? 

सा रा रा सा रा रा सब क्यौ गबैत ,
बात हनुमानक बाबू सँ सब क्यौ करैत 
पीने मदमत्त जेना हाथी बताह कोनो 
तेजी सँ अनढनायल कत्तहु जा रहल छलाह 

की तखने भ' लटपट हाथ हैन्डिल सँ छूटि गेलनि
आ ट्रकक समक्ष ई गाड़ी छल आबि गेलनि 
ट्रक त' निपत्ता भेल ,
आब मात्र सड़क छल 
गाड़ी छल,
ई चारू सड़क पर 
आ एक्कहि टा रंग जेना सब ठाम छल पसरि गेल....


Tuesday, November 30, 2010

हम इंटरव्यू लेल छी तैयार....

हम इंटरव्यू लेल छी तैयार....

सूट-बूट पर टाई लगा, हम इत्र समूचा आई लगा
आ ल' प्रमाण-पत्रक भंडार
इंटरव्यू लेल छी तैयार.......

हम सतत वर्ग में प्रथम केलहुं
नाटक गायन में भाग लेलहुं
हो भाषण व हो चित्रकला
सब में हम शीर्षे पर रहलहुं
अपना पर नहि तखनो प्रतीति 
सब कहइत अछि चिंता बेकार
हम छी इंटरव्यू लेल तैयार........

हर इंटरव्यू में फेल भेलहुँ अछि
ओकरा सब लेल खेल भेलहुँ अछि
सबठा, सदिखन भेड़िया-धसान में
हम बस ठेलम-ठेल भेलहुँ अछि
कोनो बेर लहबे करतै
माँ कयने अछि कबुला हज़ार 
हम छी  इंटरव्यू लेल तैयार........

दाढ़ी संग मोछो कटा लेलहुं
हम टाई ठोंठ में सटा लेलहुं
चमचम जूता, उज्जर बुशर्ट
पर कारी पैटो  सिया लेलहुं
ताहू पर स' औ छाटि देत
ज' नहीं छोड़बै  मुस्की फुहार
हम छी  इंटरव्यू लेल तैयार........

सय टा कुल सीटक बात छैक
ओहि पर हज़ार केर हाथ छैक
कतबो हम आगाँ रही पांति में
किछु सीट भी.आई.पी. कात छैक
एहि बेर मुदा संकल्प कयल
कोनो बाधा हो करब पार........
हम छी  इंटरव्यू लेल तैयार........

Saturday, October 23, 2010

कि आब हम सुरक्षित छी?

एक दिन हम बाट भटकि पहुंची गेलहुं जंगल में
छोट, पैघ, ठुठ्ठ, लदल सब तरहक गाछ छल 
सनसनाइत हवा संगे सरसराइत पात छल 
चिडै सबहक चीं चीं केर मद्धिम आवाज़ सेहो

हर्ष संगहि विस्मय भेल प्रकृतिक सुन्दरता पर
आह! कतेक सुन्दर अछि अंतर्मन बाजि उठल
मुग्ध भेल, मग्न भेल, अपलक ओहि दृश्य केर रहलहुं तकैत हम
कि एकरो मेटा देतै ?
क्रुद्ध भेल मन लोकक मानसिक दुर्बलता पर

कोना क्षणिक सुख भरि लेल
नष्ट-भ्रष्ट क दैत अछि यत्न स बनाओल गेल ईश्वर केर चित्रकला

कोना अपन सोफा,पलंग,आलमीरा लेल     
छिन्न-भिन्न क दैत अछि, ईश्वर प्रदत्त ओहि औषधि संसार कें

कोना अपन स्वार्थ सिद्धि कहुना करबाक लेल
आन कोनो प्राणी केर जीबा केर
अधिकारो छीन लेल जाइत छैक

ई सब विचार सोचि मन छल अशांत भेल
बैसि गेलहुं माथ टिका गाछक वात्सल्य में,
ताबत धरि सब अरण्यवासी कें ज्ञात भेलनि,
जे जंगल केर बाहर सँ आयल
दू पैर बला फेरो अछि पशु कोनो

घेरा गेलहुं हम चहुँओर जीव-जंतु सँ
किछु समयावधि बाद अपन आंखि जखन फोलल हम
देखल जे दृश्य प्राण उपरे अटकि गेल
जतेक क्रोध,चिंता छल भीतरे सटकि  गेल
हजारो प्रकारक छल, संख्या त' लाख में
हमर प्राण अटकल छल यमराजक हाथ में

प्रानघ्न पशु सब छल अगिले कतार में
प्राणक एक डोरी छल भगवानो हाथ में
तें कबुला-पाती केर सूची तैयार कयलहु
डरें छल आवाज़ बंद तखनो चीत्कार कयलहु

चौकी सँ खसि पड़लहूँ, धम्म ड़' आवाज़ भेल
आंखि हमर फ़ूजि गेल, नींद सेहो टूटि गेल,
फक्क द' क' सांस छुटल
आब हम सुरक्षित छी
मन में उसास भेल 
मात्र एक स्वप्न छल  ई से तखन ज्ञात भेल

मुदा एक प्रश्न उठल अगिले क्षण मन में
कि आब हम सुरक्षित छी ?
कि सत्ते सुरक्षित छी?




 


Sunday, April 25, 2010

गाछक व्यथा

हमर स्कूल सँ घरक बीच में,
बाट पर छल
एकटा खूब विशाल, फल सँ लदल
पात सँ सजल
गाछ...

जकरा छाहरि    में
हम सब सुस्ताइत छलहुँ
खेलाइत छलहुँ
आ डारि पर चढ़ी फल-फलहरी खाइत छलहुँ

मुदा समयक कुचक्र
ओकर पात कें खसा देलकई
फल केर बिला देलकई
ओतबे  नहि निर्दयी,
ओहि गाछ कें सुखा देलकई

आबो ओही बाटे हम सब चलैत छी
स्कूल जाइत छी आ फेरो घुरैत छी
आबो ओ गाछ हमरा सब दिस तकैत अछि    
ओही हुलसल दृष्टि संगे शोरो पाडैत अछि
मुदा,
आब हमही नहि कोनो बच्चा
ओकरा दिस तकितो नहि छी
आ खेलाइत-धूपाइत   
ओही बाट पर चलैत-फिरैत
ओहि गाछ सँ बहुत दूर चलि जाइत छी